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सचेतन – 17 विवेकचूडामणि — “जिसे तुम सहारा समझ रहे हो… वही तुम्हें डुबो भी सकता है” 

नमस्कार… आज का सवाल बहुत गहरा है। जिस चीज़ को आप अपनी खुशी समझ रहे हैं… क्या वही धीरे-धीरे आपकी सबसे बड़ी चिंता बन रही है? जिससे सहारा चाहिए… क्या वहीं डर आ रहा है? चलिए… एक कहानी से समझते हैं। राघव का Career (professional, फिर emotional kahani hi) राघव एक successful आदमी था। Big […]

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सचेतन – 16विवेकचूडामणि —”जो तुम्हें अच्छा लग रहा है… वही तुम्हें बाँध भी रहा है” 

नमस्कार… आज का सवाल बहुत अलग है। जो चीज़ें हमें सबसे ज़्यादा खुशी देती हैं… क्या वही हमें सबसे ज़्यादा कमजोर भी बना रही हैं? फोन… Reels… स्वाद… तारीफ़… Likes… चलिए… एक कहानी से समझते हैं। अमित और उसका फोन  (relatable, थोड़ा frustrating हैं) अमित एक normal लड़का था। Office जाता… काम करता… घर आता। […]