नमस्कार। पिछली कड़ी में हमने पहली परत हटाई। अन्नमय कोश — यानी यह शरीर। हमने समझा — शरीर देखी जाने वाली चीज़ है, देखने वाला नहीं। लेकिन अब कोई कहेगा — “ठीक है, मैं शरीर नहीं। लेकिन शरीर में जो जान है, जो साँस चल रही है — वह तो मैं हूँ न?” बहुत अच्छा […]
