“कभी आपने सोचा है—हम सब इतने अलग क्यों दिखते हैं? कोई अमीर, कोई गरीब…कोई मनुष्य, कोई पशु…कोई देव, कोई साधारण… लेकिन अगर भीतर से देखा जाए—तो क्या हम सच में अलग हैं?” सच्चिदात्मन्यनुस्यूते नित्ये विष्णौ प्रकल्पिताः। व्यक्तयो विविधाः सर्वा हाटके कटकादिवत्॥९॥ सरल अर्थ “सच्चिदानंद स्वरूप,सर्वत्र व्याप्त,नित्य ब्रह्म (विष्णु) मेंयह सारी विविध सृष्टिकल्पना से प्रकट हुई […]
