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सचेतन- 24: आप पहले से ही मुक्त हैं — लेकिन एक भ्रम में जी रहे हैं

ज़रा यह कल्पना कीजिए— अगर जिस पिंजरे में आप खुद को क़ैद महसूस करते हैं,उसमें सलाखें ही न हों? अगर दरवाज़ाशुरू से ही खुला हो? अँधेरे कमरे मेंज़मीन पर पड़ी एक चीज़ को देखकरआप डर से काँप उठते हैं—साँप है! दिल तेज़ धड़कता है।साँस रुक-सी जाती है। और तभीकोई बत्ती जला देता है। वह साँप […]