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सचेतन- 47 –आत्मबोध; “जब सब कुछ मैं ही हूँ…”

क्या कभी आपने सोचा है —अगर सच में सब एक ही हैं,तो हमें अलग-अलग क्यों दिखते हैं? यह मैं…यह तुम…यह मेरा…यह दुनिया… हम हर जगह अलग-अलग चेहरों को देखते हैं।लेकिन आत्मबोध का आज का विचार कहता है की — जिसे सच्चा ज्ञान हो जाता है, वह पूरी दुनिया को अपने ही आत्मस्वरूप में देखता है। […]