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सचेतन- 40 –आत्मबोध – “नाम–रूप से परे, चिदानन्द में स्थित होना”

क्या आत्मज्ञान पाने के बादइंसान सब कुछ छोड़ देता है? क्या उसे शरीर, संसार, रिश्ते—सब त्यागकर कहीं अलग बैठ जाना पड़ता है? आत्मबोध में आज का यह विचारएक बहुत ही गलतफहमी को साफ करता है। शंकराचार्य कहते हैं—ज्ञानी भागता नहीं है, वह भ्रम से मुक्त हो जाता है। आत्मबोध का श्लोक 40 कहता है— जो […]