क्या आपने कभी चश्मा सिर पर रखकर पूरे घर में उसे ढूँढा है? या गले में पड़ी चेन को खोजते-खोजते घबरा गए हैं? भागते रहे…घबराते रहे…और अचानक किसी ने कहा —“अरे, यह तो तुम्हारे पास ही है!” आज आत्मबोध का विचार भी यही कहता है —आत्मा कभी खोई ही नहीं थी। बस भूल गए थे। […]
