क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ —जो दुनिया आप देख रहे हैं…वह असल में आप ही हैं? आप, मैं, यह धरती, यह आकाश —सब एक ही सत्य का विस्तार हैं। यह कोई कवि की कल्पना नहीं।आत्मबोध के विचार में आज हम यही बात करते हैं — “आत्मा ही यह पूरा जगत है। आत्मा से अलग […]
क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ —जो दुनिया आप देख रहे हैं…वह असल में आप ही हैं? आप, मैं, यह धरती, यह आकाश —सब एक ही सत्य का विस्तार हैं। यह कोई कवि की कल्पना नहीं।आत्मबोध के विचार में आज हम यही बात करते हैं — “आत्मा ही यह पूरा जगत है। आत्मा से अलग […]