नमस्कार। पिछली बार आपने देखा — मन की आग, जिसमें चैन जलता है। आज उससे भी गहरी बात। आज शास्त्र एक ऐसी बात कहेगा, जो सुनकर आप एक पल ठिठक जाएँगे। शास्त्र कहता है — यह पूरा संसार… मन का बनाया हुआ खेल है। कैसे? चलिए, तीन दरवाज़ों से देखते हैं। सपना। जागना। और गहरी […]
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सचेतन- 06: आत्मबोध की यात्रा -“संसार: एक जागता हुआ स्वप्न है”
“क्या आपने कभी सपना देखा है…और सपने में ही रोए हैं, डर गए हैं, खुश हो गए हैं? उस समय सपना बिल्कुल सच लगता है।लेकिन जागने के बाद हम कहते हैं—‘अरे, यह तो बस सपना था।’ शंकराचार्य कहते हैं—संसार भी कुछ ऐसा ही है।” संसारः स्वप्नतुल्यो हि रागद्वेषादिसंकुलः। स्वकाले सत्यवद्भाति प्रबोधे सत्यसद्भवेत्॥६॥ सरल अर्थ “यह […]
