क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि आपके अपने ही विचारआपको इधर-उधर पटकते रहते हैं? कभी डर,कभी चिंता,कभी भविष्य की टेंशन,तो कभी अतीत की यादें। मन जैसे एक तूफ़ान बन जाता है। लेकिन अगर मैं आपसे कहूँ किइस तूफ़ान के बीच भीएक ऐसी जगह हैजहाँ पूरी शांति है? आत्मबोध का यह प्रसंगयही जगह दिखाता है। […]
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सचेतन- 45 वेदांत सूत्र: विरह → विरक्ति → वैराग्य → संन्यास
वेदान्त की चार सीढ़ियाँनमस्कार दोस्तों,आप सुन रहे हैं सचेतन —जहाँ हम जीवन, मन और आत्मा के अनुभवों कोसरल भाषा में समझते हैं। आज का विषय है—विरह, विरक्ति, वैराग्य और संन्यास वेदान्त में ये चारों एक गहरी, आंतरिक यात्रा के चरण हैं।बाहरी दुनिया से भीतर की ओर लौटने की यात्रा। विरह — दूरी का दर्द विरह […]
