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सचेतन- 05:  आत्मबोध की यात्रा – “ज्ञान शुद्ध करता है… और फिर स्वयं विलीन हो जाता है”

“क्या आपने कभी महसूस किया है—कि भीतर कुछ धुँधला-सा है?जैसे मन साफ़ होना चाहता है…लेकिन कोई परत, कोई मैल, हट नहीं रही? शंकराचार्य कहते हैं—यह मैल अज्ञान का है।और इसे हटाने का एक ही उपाय है—ज्ञान का अभ्यास।” अज्ञानकलुषं जीवं ज्ञानाभ्यासाद्विनिर्मलम्। कृत्वा ज्ञानं स्वयं नश्येज्जलं कतकरेणुवत्॥५॥ सरल अर्थ “अज्ञान से मलिन हुआ जीवनिरंतर ज्ञान-अभ्यास से […]