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सचेतन- 12:  आत्मबोध की यात्रा – “यह शरीर मेरा घर है, मैं घर नहीं हूँ”

“कभी आपने अपने शरीर से कहा है—तुम थक गए हो…तुम बीमार हो…तुम बूढ़े हो रहे हो… लेकिन कभी आपने खुद से पूछा—क्या मैं ही यह शरीर हूँ? अगर शरीर बदलता है,बीमार होता है,थकता है…तो क्या मैं भी बदल जाता हूँ? आज की बात बहुत छोटी है,लेकिन जीवन को हल्का कर देने वाली है।” पञ्चीकृतमहाभूतसंभवं कर्मसंचितम्। […]