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सचेतन — 44 “‘मैं शरीर हूँ’ — यह सोच छोड़िए, मुक्ति पाइए”

नमस्कार। आज हम एक यात्रा के पड़ाव पर पहुँचे हैं। पिछली कड़ियों में आपने सीखा — शरीर क्या है। “मैं शरीर हूँ” — इस सोच से दुख कैसे आता है। और तीन तरह के लोग कौन हैं। अब आखिरी कदम। और यह कदम बहुत सरल है। बस एक काम — “मैं शरीर हूँ” वाली सोच […]

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सचेतन- 42 वेदांत सूत्र: साधना-चतुष्टय — मोक्ष और आत्मज्ञान के लिए चार आवश्यक योग्यताएँ

नमस्कार दोस्तों,आप सुन रहे हैं सचेतन,जहाँ हम जीवन को भीतर से समझने की कोशिश करते हैं—शांति, विवेक और आत्मज्ञान के रास्तों पर चलने की प्रेरणा लेते हैं। आज का विषय है—“साधना-चतुष्टय: मोक्ष या आत्मज्ञान की राह में ज़रूरी चार योग्यताएँ।” ये चार योग्यताएँ सिर्फ़ आध्यात्मिक साधना के लिए ही नहीं,बल्कि रोज़मर्रा के जीवन को सुंदर, […]

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सचेतन- 41 वेदांत सूत्र: “मोक्ष: जीते-जी मुक्त होने का आनंद”

सचेतन- 41 वेदांत सूत्र: “मोक्ष: जीते-जी मुक्त होने का आनंद”(The Joy of Realizing Oneness)  नमस्कार दोस्तों 🌸स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे वेदांत के चौथे अध्याय — फल अध्याय — की,जहाँ एक साधक की साधना का अंतिम फल बताया गया है। वह फल है — जीव और ब्रह्म की एकता का अनुभव,और […]

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सचेतन- 04: क्या हर मनुष्य मोक्ष चाहता है?

सृष्टि में करोड़ों जीव हैं — कीड़े, मछलियाँ, पक्षी, पशु… लेकिन इंसान? संख्या में बहुत कम। क्यों? क्योंकि सिर्फ मनुष्य ही सोच सकता है, श्रद्धा रख सकता है, अपने जीवन के उद्देश्य को पहचान सकता है। यानी सिर्फ इंसान को ही ज्ञान, कर्म और आनंद — इन तीनों का अनुभव करने की पूरी क्षमता है।पेड़–पौधे […]