“कभी आपने सोचा है—हम इतने अलग क्यों दिखते हैं? मेरा शरीर अलग, आपका अलग…मेरी उम्र अलग, आपकी अलग…मेरी कहानी अलग, आपकी अलग… लेकिन क्या मैं सच में अलग हूँ?या अलग-अलग सिर्फ़ ‘कवर’ हैं?” यथाकाशो हृषीकेशो नानोपाधिगतो विभुः। तद्भेदाद्भिन्नवद्भाति तन्नाशे केवलो भवेत्॥१०॥ सरल अर्थ “जैसे आकाश एक होते हुए भीअलग-अलग घड़ों/कमरों (उपाधियों) के कारणअनेक-सा प्रतीत होता […]
