“क्या आपने कभी सपना देखा है…और सपने में ही रोए हैं, डर गए हैं, खुश हो गए हैं? उस समय सपना बिल्कुल सच लगता है।लेकिन जागने के बाद हम कहते हैं—‘अरे, यह तो बस सपना था।’ शंकराचार्य कहते हैं—संसार भी कुछ ऐसा ही है।” संसारः स्वप्नतुल्यो हि रागद्वेषादिसंकुलः। स्वकाले सत्यवद्भाति प्रबोधे सत्यसद्भवेत्॥६॥ सरल अर्थ “यह […]
