नमस्कार। मनोमय कोश की यात्रा आज पूरी होती है। अब तक आपने देखा — मन में “मैं-मेरा” बनता है। मन ही संसार रचता है। मन ही बाँधता है, मन ही छुड़ाता है। आज दो बातें बाकी हैं — मन को धोएँ कैसे? और आखिरी सवाल — क्या यह मन “मैं” हूँ? पहले देखिए — मन […]
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सचेतन — 48 “जो बाँधता है, वही छुड़ाता है — मन के दो चेहरे”
नमस्कार। पिछली बार आपने देखा — संसार मन की रचना है। तो एक डर पैदा हो सकता है — “अगर मन ही सब गड़बड़ की जड़ है… तो क्या मन दुश्मन है?” आज शास्त्र इसका बहुत सुंदर जवाब देता है। शास्त्र कहता है — नहीं। मन दुश्मन नहीं। मन दोनों है। जो बाँधता है — […]
सचेतन — 47 “सपना, जागना, गहरी नींद — मन का जादू”
नमस्कार। पिछली बार आपने देखा — मन की आग, जिसमें चैन जलता है। आज उससे भी गहरी बात। आज शास्त्र एक ऐसी बात कहेगा, जो सुनकर आप एक पल ठिठक जाएँगे। शास्त्र कहता है — यह पूरा संसार… मन का बनाया हुआ खेल है। कैसे? चलिए, तीन दरवाज़ों से देखते हैं। सपना। जागना। और गहरी […]
सचेतन — 46 “मनोमय कोश — ‘मैं-मेरा’ की फैक्ट्री… नहीं, ‘मैं-मेरा’ का कारखाना”
नमस्कार। दो परतें हट चुकी हैं। शरीर — दिखता है, इसलिए मैं नहीं। साँस — कुछ जानती नहीं, इसलिए वह भी मैं नहीं। आज तीसरी परत। और यह परत सबसे ताक़तवर है। सबसे चालाक। इसका नाम है — मनोमय कोश। यानी मन की परत। आपके विचार। आपकी भावनाएँ। आपके सुख-दुख। आज इसी से मुलाक़ात। मनोमय […]
सचेतन —19: “तुम्हारे भीतर 4 शक्तियाँ हैं”
नमस्कार। तुम्हारे भीतर 4 शक्तियाँ हैं। ये अक्सर लड़ती रहती हैं। चलो, समझते हैं। आदित्य आदित्य एक student है। उसके सामने एक सवाल है। Job करूँ या business शुरू करूँ? एक दिन कहता है — “Job सुरक्षित है।” अगले दिन — “नहीं, business करूँ।” फिर — “पहले experience ले लूँ।” ये सप्ताह भर चलता है। […]
सचेतन- 05:साधना (Sādhanā): मन पर विजय की दिशा” “Sādhanā: Mastery of the Mind”
नमस्कार और स्वागत है आपका ‘सचेतन’ के इस आत्म-खोज के नए अध्याय में।आज हम बात करेंगे उस गहराई की, उस पथ की — जिसे हम कहते हैं: “साधना”। साधना केवल किसी धार्मिक कर्मकांड का नाम नहीं है, यह एक पवित्र अनुशासन (sacred discipline) है — जिसमें हमारा शरीर, श्वास और मन, तीनों एक ही ध्येय […]
सचेतन- 09: यह चेतन एक प्रयोगशाला है: जीवन का अंतर्यात्रा स्थल
हमारा मन, शरीर और आत्मा — ये मिलकर चेतन प्रयोगशाला की तरह हैं। 🧘♀️ क्यों है यह चेतन प्रयोगशाला विशेष? क्योंकि… “जीवन एक प्रयोगशाला है, और चेतना उस प्रयोग का केंद्र है। सत्, चित् और आनन्द — इसी प्रयोग का अंतिम फल है।” मन: चेतन प्रयोगशाला का प्रयोगकर्ता जहाँ मन प्रयोग करता है — अपने […]
सचेतन- 11: समझदारी (Wisdom) – अनुभव और विवेक का मेल
जब मन स्थिर होता है, तब विज्ञान जाग्रत होता है — और जब विज्ञान शुद्ध होता है, तब प्रज्ञा (आत्मिक बोध) प्रकट होती है। “जब मन स्थिर होता है…” 👉 यानी जब मन चंचलता छोड़कर शांत और एकाग्र होता है, तब वह इंद्रियों से मिली जानकारियों को सही तरह से ग्रहण कर सकता है। “…तब […]
सचेतन- 9: मन या मनोवृत्ति
‘मनस्’, ‘विज्ञान’, और ‘प्रज्ञा’ — ये तीनों शब्द भारतीय दर्शन और उपनिषदों में मानव चेतना के विभिन्न स्तरों को दर्शाते हैं। 🧠 मनस् • विज्ञान • प्रज्ञा भारतीय दर्शन में चेतना के तीन सोपान: 🌟 1. मनस् (Manas) – विचारों की शुरुआत इंद्रियों से जानकारी लेकर उसे जोड़ता है और विचार बनाता है।उदाहरण: एक किसान […]
सचेतन- 06: हमारा शरीर, हमारा मन, और पूरी यह सृष्टि का आधार है पंचभूत 🔱
पंचभूत क्रिया एक योगिक प्रक्रिया है जिसमें साधक या योगी इन पाँच तत्वों के साथ अपने भीतर संतुलन स्थापित करता है। यह क्रिया विशेष रूप से तप, साधना, ध्यान और आंतरिक जागरण के लिए की जाती है। हमारा शरीर, हमारा मन, और पूरी यह सृष्टि — पाँच तत्वों से बनी है:पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और […]
