विषय: ब्रह्म ही आनंद है नमस्कार मित्रों,आप सुन रहे हैं “सचेतन यात्रा” —जहाँ हम उपनिषदों की वाणी से जीवन का सार खोजते हैं। आज हम बात करेंगे तैत्तिरीय उपनिषद् की एक अद्भुत वाणी की —“आनंदो ब्रह्मेति व्यजानात्।” अर्थात् — आनंद ही ब्रह्म है। हम सब जीवन में आनंद चाहते हैं —कभी वस्तुओं में, कभी लोगों […]
