0 Comments

सचेतन- 37 –आत्मबोध – “निरंतर अभ्यास ही अज्ञान की बीमारी की औषधि है”

क्या आपने कभी महसूस किया है किआप सही बात समझते हैं…फिर भी वही पुरानी बेचैनी,वही प्रतिक्रिया,वही डर लौट आता है? हम कहते हैं—“मैं आत्मा हूँ” “मैं ब्रह्म हूँ” लेकिन ज़रा-सी परिस्थिति बदलते हीहम फिर वही पुराने “मैं” बन जाते हैं। आत्मबोध में आज का विचारयही प्रश्न उठाता है—समझ आ जाने के बाद भी मन अशांत […]