नमस्कार। पिछली बार आपने देखा — संसार मन की रचना है। तो एक डर पैदा हो सकता है — “अगर मन ही सब गड़बड़ की जड़ है… तो क्या मन दुश्मन है?” आज शास्त्र इसका बहुत सुंदर जवाब देता है। शास्त्र कहता है — नहीं। मन दुश्मन नहीं। मन दोनों है। जो बाँधता है — […]
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सचेतन — 40 “विवेक की तलवार — जो कभी टूटती नहीं”
नमस्कार। आपने अब तक बहुत कुछ सीखा है। बंधन कैसे बनता है? अहंकार कैसे काम करता है। संसार का पेड़ कैसे बढ़ता है। लेकिन आज सबसे ज़रूरी बात। अगर यह सारा बंधन काटना हो… तो कैसे काटें? कौन सी चीज़ है जो सारे बंधन को एक पल में काट देती है? उसका नाम है — […]
