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सचेतन- 33 –आत्मबोध – दुख, डर और अशांति आप नहीं हैं

क्या आपने कभी महसूस किया है किमन लगातार बेचैन रहता है? कभी चिंता,कभी डर,कभी किसी से लगाव,तो कभी किसी से चिढ़। और फिर हम कहते हैं—“मैं बहुत परेशान हूँ।” लेकिन ज़रा ठहरिए— अगर यह परेशानीआपकी नहीं,आपके मन की हो तो? आत्मबोध का श्लोक 33यही क्रांतिकारी बात कहता है— आप मन नहीं हैं, और इसलिए दुख, […]