“हम जीवन भर बहुत कुछ करते रहते हैं…पूजा, जाप, यात्रा, योग, ध्यान… लेकिन एक सवाल चुपचाप खड़ा रहता है—क्या इससे सचमुच मुक्ति मिलती है? शंकराचार्य इस श्लोक मेंबहुत स्पष्ट उत्तर देते हैं।” बोधोऽन्यसाधनेभ्यो हि साक्षान्मोक्षैकसाधनम्। पाकस्य वह्निवज्ज्ञानं विना मोक्षो न सिध्यति॥ “जैसे भोजन पकाने के लिएसीधे तौर पर आग ही चाहिए—वैसे ही मोक्ष के लिए […]
