क्या आपने कभी महसूस किया है किआप सही बात समझते हैं…फिर भी वही पुरानी बेचैनी,वही प्रतिक्रिया,वही डर लौट आता है? हम कहते हैं—“मैं आत्मा हूँ” “मैं ब्रह्म हूँ” लेकिन ज़रा-सी परिस्थिति बदलते हीहम फिर वही पुराने “मैं” बन जाते हैं। आत्मबोध में आज का विचारयही प्रश्न उठाता है—समझ आ जाने के बाद भी मन अशांत […]
