“कभी आपने पानी में उठते बुदबुदे देखे हैं?वे अचानक पैदा होते हैं…कुछ देर टिकते हैं…और फिर बिना कोई निशान छोड़ेखुद ही विलीन हो जाते हैं। शंकराचार्य कहते हैं—हमारा जीवन और यह पूरा जगत भी कुछ ऐसा ही है।” उपादानेऽखिलाधारे जगन्ति परमेश्वरे। सर्गस्थितिलयान्यान्ति बुद्बुदानीव वारिणि॥८॥ सरल अर्थ “यह सम्पूर्ण जगतउस परमेश्वर में उत्पन्न होता है,उसी में […]
