नमस्कार। दो परतें हट चुकी हैं। शरीर — दिखता है, इसलिए मैं नहीं। साँस — कुछ जानती नहीं, इसलिए वह भी मैं नहीं। आज तीसरी परत। और यह परत सबसे ताक़तवर है। सबसे चालाक। इसका नाम है — मनोमय कोश। यानी मन की परत। आपके विचार। आपकी भावनाएँ। आपके सुख-दुख। आज इसी से मुलाक़ात। मनोमय […]
