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सचेतन – 15 विवेकचूडामणि — “क्या मैं सिर्फ यह शरीर हूँ?” 

नमस्कार… आज की बात थोड़ी अलग है। थोड़ी गहरी है। लेकिन बहुत ज़रूरी है। आज हम एक सवाल पूछेंगे खुद से— “क्या मैं सिर्फ यह शरीर हूँ?” चलिए… एक कहानी से शुरू करते हैं। सुनीता का आईना  सुनीता 45 साल की थी। रोज़ सुबह उठती… आईने में देखती… और रोती। “ये झुर्रियाँ कहाँ से आ […]

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सचेतन 3.01 : नाद योग: एक आध्यात्मिक सफर