0 Comments

सचेतन- 18:   मैं राजा हूँ, मेरे भीतर सब चल रहा है

क्या आपने कभी उस बेचैनी, उस हल्की-सी घबराहट पर गौर किया है जो हर समय हमारे साथ चलती रहती है? वो एक एहसास कि कुछ तो गड़बड़ है—बाहर की दुनिया में नहीं, बल्कि हमारे अपने अंदर। यह एक खामोश तकलीफ है, सीने में एक तनाव जिसके साथ हम सुबह उठते हैं और बस… उसे पूरे […]