साधना में आत्मानुभूति और ब्रह्मविद्या साधना के मार्ग में आत्मानुभूति मंज़िल है और ब्रह्मविद्या उसका नक्शा। आत्मानुभूति — स्वयं का प्रत्यक्ष साक्षात्कार।यह केवल “मैं कौन हूँ” का उत्तर नहीं, बल्कि गहराई से जिया हुआ अनुभव है कि हम शरीर या मन नहीं, बल्कि शुद्ध, अविनाशी चेतना हैं।जैसे अंधेरे में दीप जलने पर सब स्पष्ट दिखने […]
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सचेतन- 07: आनन्द — आत्मानुभूति से उत्पन्न सुख
सत्-चित्-आनन्द: मनुष्यत्व की तीन सीढ़ियाँ 1️⃣ सत् (सत्य / अस्तित्व): सच्चाई को जानना और उसे जीना। यह हमें यथार्थ का बोध कराता है — सही निर्णय और शुद्ध कर्म की दिशा देता है। 2️⃣ चित् (चेतना / विवेक): जागरूकता और आत्मबोध का विकास। यह हमें दूसरों से अलग बनाता है — हम सोच सकते हैं, […]
