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सचेतन- 31 – जो टूटने वाला है, वह आप नहीं हो सकते

क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि आपके अपने ही विचारआपको इधर-उधर पटकते रहते हैं? कभी डर,कभी चिंता,कभी भविष्य की टेंशन,तो कभी अतीत की यादें। मन जैसे एक तूफ़ान बन जाता है। लेकिन अगर मैं आपसे कहूँ किइस तूफ़ान के बीच भीएक ऐसी जगह हैजहाँ पूरी शांति है? आत्मबोध का यह प्रसंगयही जगह दिखाता है। […]

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सचेतन- 25 सबसे बड़ा झूठ जो आप रोज़ खुद से बोलते हैं

क्या आप जानते हैंकि आप हर दिन खुद से एक झूठ बोलते हैं? एक ऐसा झूठजो आपको समझदार, स्मार्टऔर कंट्रोल में महसूस कराता है— लेकिन असल मेंयही झूठआपके ज़्यादातर दुखों और संघर्षों की जड़ है। और वो झूठ है— “मैं जानता हूँ।” …. ये तीन छोटे शब्दबहुत मामूली लगते हैं, है न? लेकिन क्या आपने […]

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सचेतन- 17:  आत्मा हर जगह है, फिर भी हमें दिखती क्यों नहीं?

नमस्कार मित्रों,आज सचेतन में एक बहुत ही सरल,पर बहुत गहरी बात पर बातचीत करेंगे। एक सवाल से शुरू करते हैं— क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है किसब कुछ होते हुए भीकुछ अधूरा-सा है? लोग हैं, काम है,हँसी भी है…फिर भी भीतर कहींएक दूरी-सी,एक खालीपन-सा। हम सोचते हैं—शायद कुछ मिल जाए,तो यह भर जाएगा।कोई रिश्ता,कोई […]