हम जीवन भर एक ही प्रश्न से जूझते रहते हैं—“मैं कौन हूँ?” कभी हम स्वयं को शरीर मान लेते हैं,कभी मन,कभी रिश्ते,कभी सफलता या असफलता। लेकिन आत्मबोध का यह अंतिम श्लोकहमें सीधा, स्पष्ट और निर्भय उत्तर देता है— “तुम वही हो, जिसे तुम खोज रहे थे।” शंकराचार्य कहते हैं— मैं नित्य शुद्ध हूँ, सदा मुक्त […]
